दिल कुछ कहना चाहता है
कुछ
अपनी
और
कुछ
तुम्हारी
सुन्ना
चाहता
है
इसको
आदत
हो
गई
है
तुम्हारी
बस ये तुम्हे बताना चाहता है
दिल
तुमसे
बहुत
कुछ
कहना
चाहता
है
आओ
बैठो
पास
हमारे
ये
तुम्हारा
दिद्दार
करना
चाहता
है
ये
याद
में
तुम्हारी
रोता
है
भीड़
में
भी
तुम्हे
ही
खोजता
है
दिल
तुम्हारा
ज़िकर
करता
है
अकेले
में
बी
तुम्हे
ही
याद
करता
है
ये
तुम्हे
ही
पाना
चाहता
है
बस
चीख
चीख
के
ये
हमसे
कहता
है
ये
दिल
बस
तुमसे
मिलने
की
ख्वाहिश
करता
है
आज
बी
वक़्त
बेवक़्त
ये
तुम्हारी
बातें
करता
है
अपनी
ही
नहीं
तुम्हारी
भी
सुन्ना
चाहता
है
आजाओ
लौट
कर
तुम
दिल
कुछ
कहना
चाहता
है..
दिल
कुछ
कहना
चाहता
है....

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