बेख़ौफ़ जी ऐ परिंदे
Image Source: pikwizard बेख़ौफ़ जी ऐ परिंदे कल की क्यू फ़िक्र करता है आज ऐसा क्या नहीं जो कल की सोचता है इस पल को जी भर के जी क्यों इसको कल की फ़िक्र में खोता है काश ये हो जाये वो हो जाये की रट लगाए रखता है आज जो है उसकी कदर कर क्यों मारा मारा फिरता है ऐ परिंदे तू जी भर के क्यों नहीं जीता है? थोड़ा सुकून आज में भी देखा कर क्यू इस मोह माया में पड़ता है ये पल कितना अनोखा है तू क्यों इसे खोता है आ...