क्या सोचा था
इक इक पल मुश्किल से बीत रहा है
वो हमारे नहीं ये एहसास हो रहा है,
चाहते न थे हम अकेले रहना
किसी की बेवफाई का एहसास हो रहा है
क्या सोचा था और क्या हो रहा है
बनना चाहते थे उनका हमसफ़र
लेकिन वो साथी पीछे छूट गया है
क्या चाहा था और क्या हो रहा है
दिल ये इतना क्यू मजबूर हो रहा है?
रहना चाहते है उनके साथ
बस ऐसा कुछ हो जाये जो दिला दे उनको मेरी याद
सब अधूरा अधूरा सा लगता है
और ये वक़त ठहरा सा लगता है
मिले वो जब हमे
तो लगा हमे हमने क्या किस्मत पाई है
लेकिन आज उनके चले जाने से
हमे हमारी परछाई भी न मिल पाई है
हम उनके आने के सपने बुनते रहे
लेकिन वो किसी और की बहो में हमे मिले
दिल ने ना सोचा था कभी ऐसा भी होगा
बेवक़त हमे रोना भी होगा
तुम चले गये हो हमे छोड़ कर
आज हमे ये यकीं आ गया है
ना चाहेंगे तुम्हे अब हम
क्यूंकि ये दिल खाली हो गया है
क्या सोचा था क्या हो गया
क्या सोचा था क्या हो गया......
Very heart touching poem...
ReplyDeletethank you..keep smiling
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